obc को शुद्र कहने वालो को मुंहतोड़ जबाब दें
*कोई अगर आप को ओबीसी कैटेगरी में आने के कारण आपको शुद्र कह रहा है तो उसको जूते बजाइये*
क्योंकि ओबीसी एक वर्ग आधारित संवैधानिक प्रावधान है जिसमें किसी भी धर्म और जाति के एजुकेशनली, आर्थिक व सोशियली बैकवर्ड आ सकते हैं। इसलिए obc मे मुस्लिम, क्रिश्चियन, व अन्य समुदाय भी आते हैं।
जैसे मैं मौर्य हूँ अगर मेरी आय आठ लाख सलाना से ऊपर है तो मैं मौर्य होते हुए भी ओबीसी नही हूँ, मैं सामान्य में आऊंगा
रही बात ओबीसी की तो यह एक अस्थायी प्रावधान है, जो सरकारी क्षेत्रो में बैकवर्ड क्लास को सहायता देता है। और पूरा होते ही आपको ओबीसी से हटा दिया जाएगा
1990 से पहले हम सारे लोग सामान्य में आते थे कोई ओबीसी नही था, ओबीसी या एस सी किसी भी वर्ण को रिपजेन्ट नही करता है।
जैसे आधे कोईरी (मौर्य) कई राज्यों में सामान्य में आते है, और कई राज्यों में ओबीसी में,
ओबीसी का मतलब किसी जाति विशेष से नही है, ऐसी कोई जाति नही है देश मे जो पूरे देश मे स्वयं को सामान्य या ओबीसी होने का दावा पेश कर सके
जैसे पूरा बाम्हन मणिपुर में 1990 से आज तक ओबीसी वर्ग में आता है
भट्ट, त्यागी,ओझा, बैरागी यूपी बिहार हरियाणा आदि राज्यो में ओबीसी में आते है और कुछ राज्यो में भी बाम्हन obc लिस्ट में शामिल है।
मोदी की जाति को ले लीजिए घाची तेली गुजरात मे ओबीसी बिहार यूपी अति पिछड़ा हिमाचल में एससी और झारखंड राजस्थान में
सामान्य एक ही जाती का स्टेटस अलग अलग राज्यो में अलग अलग है
यही स्तिथि राजपूतो की भी है, और यही स्तिथि हमारी भी है
बाबा के संवैधानिक चेले आज कल ओबीसी को शुद्र होने का सर्टिफिकेट बाटते फिर रहे है।
उनसे पूछा जाना चाहिए कि संविधान के अनुसार ओबीसी एक कैटेगरी है जिसमे आर्थिक रूप से पिछड़े हुये सभी धर्मों के लोग सामिल है जिसमे
हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई जैन बौद्ध पारसी सभी लोग सामिल है फिर किस आधार पर ये चूतिये भीमते ओबीसी समाज को सुद्र होने का सर्टिफिकेट बाटते है
क्या मुस्लिम सिक्ख ईसाई जैन पारसी भी सूद्र है
सूद्र शूद्र शब्द को हीन बनाने वाले ये भीमते ही है। ये भीमटे obc को दलित वोटबैंक बनाने के लिए, obc को शुद्र बताने मे तुले रहते हैं। और कभी बहुजन भी बना देते हैं। obc न शुद्र है और न ही बहुजन। भीमटो के षडयंत्र से सावधान रहे।
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क्योंकि ओबीसी एक वर्ग आधारित संवैधानिक प्रावधान है जिसमें किसी भी धर्म और जाति के एजुकेशनली, आर्थिक व सोशियली बैकवर्ड आ सकते हैं। इसलिए obc मे मुस्लिम, क्रिश्चियन, व अन्य समुदाय भी आते हैं।
जैसे मैं मौर्य हूँ अगर मेरी आय आठ लाख सलाना से ऊपर है तो मैं मौर्य होते हुए भी ओबीसी नही हूँ, मैं सामान्य में आऊंगा
रही बात ओबीसी की तो यह एक अस्थायी प्रावधान है, जो सरकारी क्षेत्रो में बैकवर्ड क्लास को सहायता देता है। और पूरा होते ही आपको ओबीसी से हटा दिया जाएगा
1990 से पहले हम सारे लोग सामान्य में आते थे कोई ओबीसी नही था, ओबीसी या एस सी किसी भी वर्ण को रिपजेन्ट नही करता है।
जैसे आधे कोईरी (मौर्य) कई राज्यों में सामान्य में आते है, और कई राज्यों में ओबीसी में,
ओबीसी का मतलब किसी जाति विशेष से नही है, ऐसी कोई जाति नही है देश मे जो पूरे देश मे स्वयं को सामान्य या ओबीसी होने का दावा पेश कर सके
जैसे पूरा बाम्हन मणिपुर में 1990 से आज तक ओबीसी वर्ग में आता है
भट्ट, त्यागी,ओझा, बैरागी यूपी बिहार हरियाणा आदि राज्यो में ओबीसी में आते है और कुछ राज्यो में भी बाम्हन obc लिस्ट में शामिल है।
मोदी की जाति को ले लीजिए घाची तेली गुजरात मे ओबीसी बिहार यूपी अति पिछड़ा हिमाचल में एससी और झारखंड राजस्थान में
सामान्य एक ही जाती का स्टेटस अलग अलग राज्यो में अलग अलग है
यही स्तिथि राजपूतो की भी है, और यही स्तिथि हमारी भी है
बाबा के संवैधानिक चेले आज कल ओबीसी को शुद्र होने का सर्टिफिकेट बाटते फिर रहे है।
उनसे पूछा जाना चाहिए कि संविधान के अनुसार ओबीसी एक कैटेगरी है जिसमे आर्थिक रूप से पिछड़े हुये सभी धर्मों के लोग सामिल है जिसमे
हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई जैन बौद्ध पारसी सभी लोग सामिल है फिर किस आधार पर ये चूतिये भीमते ओबीसी समाज को सुद्र होने का सर्टिफिकेट बाटते है
क्या मुस्लिम सिक्ख ईसाई जैन पारसी भी सूद्र है
सूद्र शूद्र शब्द को हीन बनाने वाले ये भीमते ही है। ये भीमटे obc को दलित वोटबैंक बनाने के लिए, obc को शुद्र बताने मे तुले रहते हैं। और कभी बहुजन भी बना देते हैं। obc न शुद्र है और न ही बहुजन। भीमटो के षडयंत्र से सावधान रहे।
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Sambidhan k anusar OBC chudra nahi hai
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