भीमवादी राजनीति का शिकार होता पिछड़ा वर्ग

*भीमवाद राजनीति का शिकार होता पिछड़ा वर्ग ***

अक्सर भीमवादी obc को दलित वोटबैंक कि राजनीति में साधने की कोशिश करते हैं। ताकि एक मजबूत दलित वोट बैंक बनाकर सत्ता तक पहुंचा जा सके।

भीमवादी नेताओ ने obc को दलित वोटबैंक कि राजनीति में साधने के लिए जिन मुद्दों को आधार बनाया है उन में से कोई भी मुद्दा obc हित से नहीं जुड़ा है, सारे मुद्दे नफरत और बदला लेने की भावना पर आधारित है। जैसे
_ obc शूद्र है। अछूत है। नीच हैं।
_बाम्हनवाद का जहर पिलाकर।बाम्हन
ने फलाना किया, ढिमाका किया। वगैरह वगैरह।
आप मुद्दे देखें, हीन भावना से भरकर नफरत और बदले के लिए ही तैयार करने की मंशा स्पष्ट दिखाई देगा। और obc को बनावटी मुद्दों पर उलझाकर उसकी सोचने समझने की शक्ति को नष्ट करना है। ताकि obc इन्हीं फालतू के मुद्दों में उलझा रहे और अपने अधिकारों की मांग न करे, भेदभाव पूर्ण संविधान पर सबाल न करे, बस भीमवादी की गुलामी करता रहे और दलित वोटबैंक बना रहे।
सवाल यह भी है कि
_अगर वाकई में obc शूद्र है तो फिर  schedule caste की  तरह ही obc को जाति आधारित आरक्षण क्यू नहीं दिया?obc को जनरल के साथ क्यू रखा?
क्यों obc पर creamilayer लागू है?
_अगर obc शूद्र है तो फिर क्यूँ Article 340 बनाकर obc को schedule caste से अलग रखा गया?
_अगर obc शूद्र है फिर क्यों Article 340 में obc को जाति आधारित नहीं बनाया गया ?
_अगर obc शूद्र है तो फिर obc पर दलित एक्ट  क्यों लगता है, ?
_और अगर obc शूद्र है तो फिर  obc में मुस्लिम, ईसाई, बाम्हन, बनिया व अन्य वर्ग  क्यों शामिल हैं?
- अगर obc शूद्र है तो फिर क्यों obc को लोकसभा, विधानसभा, प्रमोशन में आरक्षण नहीं दिया गया?
इन सवालों के जवाब मागने पर भीमवादी आपको संघी का लेबल देकर निकलते बनेगे।


भीमवादीयो ने obc को शुद्र बताने की एक मुहिम छेड़ रखी है क्योंकि ये ही obc को भीमवाद का गुलाम बनाने की पहली सीढ़ी है। भीमवादी पहले obc को शुद्र बताते हैं फिर हीन भावना से भरते हैं, शोषण कि कहानी सुनाते है, बाम्हन को दुश्मन बताते हैं उससे बदला लेने के लिए उकसाते है,व नफरत से भर देते हैं। जो obc भीमवादीयो के चक्कर में फस जाते हैं वो कट्टरपंथी बन जाते हैं, कई बार गैरकानूनी और भडकाऊ कार्य करने लगते हैं। जेल भी पहुंच जाते हैं। जैसे केदारनाथ मंडल भीमवाद में इतना डुब गया कि धार्मिक भावना भडकाने का काम करने लगा। और FIR हो गई। आप सोचिए कि इन सबसे obc का क्या भला? इन सब से नुकसान obc का होता है फायदा सिर्फ भीमवादीयो को होता है। उनकी राजनीति आगे बढती है। obc को  इस तरह  भीमवादी अपना  वोट बैंक बनाते हैं। एक बात स्पष्ट कर दू कि obc शूद्र है या नहीं है ये कोई मुद्दा नहीं।पर जब भीमवादी obc  को दलित  वोटबैंक बनाने के लिए उसे शूद्र घोषित करने के सनक में होगे तब उनके दलित वोटबैंक के राजनीति कि धज्जियां उडानें के लिए सवाल किए जाएंगे। अगर obc शूद्र है तो फिर क्यों obc पर sc, st act लगता है? अगर obc तो फिर obc मे मुस्लिम क्रिश्चियन क्यों आते हैं? अगर obc शूद्र है तो फिर obc को लोकसभा विधानसभा में आरक्षण क्यों नहीं दिया गया? अगर obc शूद्र है तो फिर obc को दलितों की तरह संवैधानिक अधिकार क्यों नहीं दिए गए? अगर obc शूद्र है तो संविधान ने obc को Depressed caste क्यों नहीं माना? अगर obc शूद्र है तो यह बात संविधान के किस अनुच्छेद में लिखा है? और भी कई सबाल है।

अब बाम्हनवाद पर आते हैं।

_sc act के तहत हजारों obc जेल में सड़ रहे हैं। ज्यादातर मामले झूठें होते हैं। आपसी रंजिश के चलते फसाऐ जातें है। क्या ये बाम्हनवाद है?

_pramotion में sc आरक्षण के कारण जूनियर अफसर बन जाता है। obc को अपने से जूनियर को साहब बोलना पडता है। क्या ये बाम्हनवाद है?

_जब कभी दलित-obc में झड़प या हिंसा होती है तब यादव,जाट, गुर्जर, कुर्मी  आदि को दबंग  कहकर उन्हें क्रु्र और अपराधियों कि तरह पेश किया जाता है। एक बार भी जानने की कोशिश नहीं की  जाती की गुनाहगार कौन है। दलित तो दलित ही बना रहता है बस obc दबंग बन जाता है। क्या ये बाम्हनवाद है?
pramotion में सिर्फ sc, st को आरक्षण और लोकसभा विधानसभा में obc को कोई आरक्षण नहीं। क्या ये बाम्हनवाद है?
obc को संवैधानिक भेदभाव का सामना हर जगह करना पडता है। क्या ये सब बाम्हनवाद है? आखिर obc के साथ हो रहे संवैधानिक भेदभाव के खिलाफ कोई क्यों कुछ नहीं बोलता? भीमवादीयो ने बाम्हनवाद का मुद्दा सिर्फ इसलिए बनाया ताकि obc इन्हीं बेकार के मुद्दों पर उलझा रहे और अपने संवैधानिक अधिकार कि मांग न करे। एक सबाल और उठता है कि जो obc  भीमवादी के बाम्हनवाद मनुवाद कि बातो में  आकर बौद्ध बन गए क्या उन्हें दलितों की तरह संवैधानिक अधिकार मिले? क्या उन पर से sc, st act का कानून हट गया? क्या उन्हें लोकसभा विधानसभा में आरक्षण मिला? अतः obc को ये सोचना होगा कि उसे कैसे संवैधानिक अधिकार मिलेगे? और उसके संघर्ष कि दिशा क्या होनी चाहिए। बाम्हनवाद के साथ भीमवाद से भी लडना होगा।

जब उ.प्र  के तात्कालिक मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव जी ने pramotion में sc के आरक्षण को लागू नहीं होने दिया था।
तब अखिलेश यादव जी का विरोध मायावती जी ने किया था। अब ऐसे में कैसे भीमवादी राजनीति में पिछड़ा वर्ग शामिल होगा।

obc इस बात को समझता है कि हमारी दशा और मुद्दे अलग है। obc सिर्फ बाम्हन विरोधी नफरत के आधार पर भीमवादीयो के वोटबैंक राजनीति में शामिल नहीं हो सकते।

obc कि महान विरासत संत सेन, संत नामदेव, संत गाडगे,संत तुकाराम, संत सावता माली,माँ कर्मा,श्रीयादे माता, लोकमाता अहिल्याबाई, राजा भोज, राजा सहस्रबाहू, शिवाजी जी महाराज,सरदार पटेल, भगवान विश्वकर्मा, बलराम, लवकुशऔर स्वयं यदुवंशी भगवान् श्रीकृष्ण की है। जिन्होंने सनातन संस्कृति की जड़ें मजबूत की। obcअपने महान विरासत से मजबूती से जुड़ा है। अपने सनातनी होने पर गर्व महसूस करता है। इसलिए obc बाम्हनवाद के नाम पर हिंदू विरोधी नहीं हो सकता।

भीमवादी नेता सपना देखना छोड़ दें कि वो obc को  हिंदू विरोधी बनाने में कभी सफल होंगे।भीमवादीयो का obc को अपने वोटबैंक कि राजनीति में शामिल करने का अरमान कभी पूरा नहीं होगा। भीमवादी हमें तोड़ने में कभी कामयाब नहीं होगा।
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Comments

  1. Sahi baat hai sir 🙏💐
    Isi me aage aur failunga sabhi logo ke liye
    Jai Hind Jai Bharat 🇮🇳🇮🇳

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  2. Lekin ye ni bataya ki obc ka hk kon mar rha hai....data dekh lo

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  3. ब्राह्मण वाद अब धार्मिक स्थलों और मंदिरों में नहीं संसद, विधानसभाओं सचिवालयों, और प्रशासनिक कार्यालयों, न्यायालयों, और शैक्षणिक संस्थानों में बैठा है। इसलिए जो अधिकार नहीं मिल रहे हैं उसके लिए भीमवाद नहीं मनुवाद जिम्मेदार है वहीं

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